सुबह की सैर कहानी

सुबह की सैर

राहुल और निधि छुट्टियों में अपने मामा दिनेश चंद्र जी के गाँव आए। यहाँ उनको बहुत अच्छा लगा। कहाँ शहरों का शोरगुल एवं धुआँ, और कहाँ यहाँ की शांति और खुली हवा! दिनभर वे अपने दोस्तों के साथ खेलते रहे। रात को उन्हें खूब नींद आई। कब सवेरा हो गया. पता ही नहीं चला।

राहुल की नींद खुली तो उसने देखा कि मामा जी कहीं जा रहे हैं। उसने पूछा, "मामा जी! सवेरे-सवेरे आप कहाँ जा रहे हैं?"


'राहुल, मैं प्रातः घूमने के लिए जा रहा हूँ। तुम भी चलना चाहो तो जल्दी तैयार हो जाओ। सवेरे-सवेरे खुली हवा में घूमने से शरीर स्वस्थ रहता है, मन खुश रहता है और बुद्धि भी तेज होती है।" दिनेश चंद्र जी ने हँसते हुए कहा, "देखो, निधि भी तैयार हो गई है।"


"हाँ मामा जी, मैं भी घूमने चल रही हूँ।" निधि ने कहा। राहुल तो एकदम खड़ा हो गया। उसे घूमने का तो बड़ा शौक है परंतु वह स्कूल के खेलकूद और दौड़ में हिस्सा नहीं ले पाता क्योंकि उसके शरीर में शक्ति नहीं है, वह कमज़ोर है।


दिनेश चंद्र जी राहुल और निधि के साथ घर से निकलकर सड़क पर आ गए और तेज़ कदमों से चलने लगे। सड़क के दोनों ओर हरे-भरे खेत थे, जिनमें अनाज और सब्जियों की फसलें लहलहा रही थीं। पक्षियों की मीठी आवाजें कानों को बहुत अच्छी लग रही थीं।


निधि ने पूछा, "मामा जी! आप इतनी तेज़ी से क्यों चल रहे हैं?"


दिनेश चंद्र जी ने समझाया, "बेटी, तेज चलने से हमारे शरीर में फुरती आती है। हम जब गहरी साँस लेते हैं, तो फेफड़े ताकतवर बनते हैं। उनकी गंदी हवा बाहर निकलती है और हमें कई रोगों से छुटकारा मिलता है। सवेरे की खुली हवा सौ दवाओं के बराबर है। "


पूर्व दिशा की ओर से सूरज झाँकने लगा था। उसकी मीठी-मीठी धूप अच्छी लग रही थी। मामा जी ने कहा, "सवेरे घूमने से हमें सूरज की धूप का लाभ भी मिलता है। उससे हमारे शरीर में फुरती आती है और रोगों से लड़ने की ताकत बढ़ती है।"


राहुल ने पूछा, "मामा जी! हमारे विद्यालय में कुछ लड़के कसरत करते हैं. कुछ खेलते हैं. कुछ दौड़ते हैं। उनका शरीर खूब ताकतवर है। मुझे शरीर को मजबूत बनाने के लिए क्या करना चाहिए?"


दिनेश चंद्र जी ने राहुल के कंधे को थपथपाते हुए कहा, "जिनका शरीर कमजोर है, उनके लिए खुली हवा में घूमना सबसे अच्छा व्यायाम है। बालक, जवान, बूढ़े सब इससे लाभ उठा सकते हैं। इस कसरत में थकान भी कम आती है और पैसा भी खर्च नहीं होता। हरे-भरे खेतों के पास खुली हवा में घूमने से आँखों की रोशनी बढ़ती है और चेहरा खिले हुए गुलाब की तरह लाल हो जाता है। " मामा जी की बातें सुनते-सुनते, साथ चलते-चलते राहुल और निधि के चेहरे भी लाल हो गए।


"डॉक्टर अपने रोगियों को खुली हवा में घूमने की सलाह देते हैं। किसी ने ठीक कहा है- सौ दवा की एक दवा।" दिनेश चंद्र जी ने कहा और तेज कदमों से चलने लगे।


राहुल और निधि भी खिलखिलाते हुए उनके पीछे दौड़ने लगे।


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