वर्षा के दिन थे। एक बालक गंगा के किनारे उदास बैठा था। उसे नदी-पार जाना था किंतु नाववाले को देने के लिए उसके पास पैसे नहीं थे।
उस लड़के के कई मित्र नाव में बैठे हुए थे। वे बोले, "तू चुपचाप नाव में बैठ जा नाववाले को पता भी नहीं चलेगा। " स्वाभिमानी बालक ने कहा, "नहीं, मैं चोरी नहीं करूंगा।"
दूसरे लोगों ने भी कहा, "बच्चे, नाव में बैठ जा, तेरे पैसे हम दे देंगे।" बालक ने कहा, "धन्यवाद!" वह किसी का एहसान भी नहीं लेना चाहता था। नाव चली गई और बालक किनारे पर अकेला रह गया। धीरे-धीरे शाम होने लगी। आखिर उसने अपने कपड़े उतारे, फिर उन्हें अपनी पीठ पर कसकर बाँध लिया और गंगा में कूद पड़ा। देखते ही देखते वह तैरकर दूसरे किनारे जा पहुँचा।
क्या तुम जानते हो, यह स्वाभिमानी और साहसी बालक कौन था? यह था नन्हें, जो आगे चलकर भारत देश का प्रधानमंत्री बना और लालबहादुर शास्त्री के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
'लालबहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर, सन् 1904 ई. को हुआ था। बचपन में ही उनके पिता की मृत्यु हो गई थी। अनेक कष्ट सहते हुए वे आगे बढ़ते गए और अपने गुणों के बल पर भारत के प्रधानमंत्री बने। उनका रहन-सहन सादा था परंतु विचार बहुत ऊँचे थे। गलत काम करना उन्हें पसंद ही नहीं था। उनका शरीर कमजोर था किंतु उनकी आत्मा बलवान थी। वे सच्चे, परिश्रमी, निडर और ईमानदार व्यक्ति थे।
10 जनवरी सन् 1966 को इस महापुरुष का देहांत हुआ। युगों तक न केवल भारत के लोग बल्कि सारी दुनिया के लोग उन्हें सम्मान से याद करते रहेंगे। उन्होंने देश को एक नारा दिया था-'जय जवान जय किसान!' जो सदियों तक गूंजता रहेगा।

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