माँ पर कविता

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ईश्वर का वरदान है माँ
हम बच्चों की जान है माँ,
मेरी नींदों का सपना माँ
तुम बिन कौन है अपना माँ?

तुमसे सीखा पढ़ना माँ
मुश्किल कामों से लड़ना माँ,
बुरे कामों में डाँटती माँ
अच्छे कामों में सराहती माँ

कभी मित्र बन जाती माँ
कभी शिक्षक बन जाती माँ,
मेरे खाने का स्वाद है माँ
सब कुछ तेरे बाद है माँ !

बीमार पढू तो दवा है माँ
भेदभाव कभी न करती माँ,
वर्षा में छतरी है माँ
कड़ी धूप में छाँव है माँ !

हे ईश्वर! धन्यवाद है तेरा
दी मुझे ऐसी प्यारी माँ !
विनती करता एक यही
हर बार बने यह ही हमारी माँ!

लेखक - प्रभाकर माचवे

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