पहले गाना गाती चिड़िया
पीछे दाना खाती चिड़िया।
खिड़की खिड़की दस्तक देकर
घर के भीतर आती चिड़िया,
कोमल-कोमल तिनके चुनकर
अपना नीड़ बनाती चिड़िया।
कभी धूल में, कभी ताल में
धो-धो पंख नहाती चिड़ियां,
काजल-मेहँदी-कंगन लेकर
सोलह रूप सजाती चिड़िया।
और सयानी बिटिया जैसी
देश छोड़ उड़ जाती चिड़िया,
भूली-बिसरी यादें बनकर
बहुत-बहुत तड़पाती चिड़िया।

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