कुछ समय पहले दिल्ली के आस-पास भूकंप के झटके महसूस किए गए। सभी मकान, दुकान, टावर आदि हिल उठे। घड़ियाँ चलते-चलते बंद हो गई। बरतन, तसवीरें, किताबें आदि सामान अपने स्थानों से गिर पड़े। लोग भय के मारे अपने घरों से बाहर आ गए और देखने लगे कि क्या बात है? आप भी सोचते होंगे कि आखिर इन झटकों के पीछे क्या रहस्य है?
देखो बच्चो! किसी समय हमारी पृथ्वी सूर्य के समान ही आग का एक गोला थी। धीरे-धीरे पृथ्वी का ऊपरी भाग ठंडा होता गया, जिस पर पेड़-पौधे उग आए और मनुष्य रहने लगे किंतु इसके अंदर का भाग आज तक गरम और पिघले हुए रूप में है। जब कभी धरती के अंदर दरारों से होकर यह पिघला हुआ पदार्थ बाहर आने की कोशिश करता है. तो धरती हिल उठती है। इस क्रिया को 'भूकंप' या 'भूचाल' कहते हैं। भूकंप से धरती पर बहुत नुकसान होता है। नदियों के स्थान पर पहाड़ और पर्वतों के स्थान पर झीलें बन जाती हैं। बड़े-बड़े शहर क्षणभर में बच्चों के खिलौनों की तरह नष्ट हो जाते हैं। ऐसे समय में बेचारे मनुष्यों और पशु-पक्षियों के जीवन का कोई ठिकाना नहीं रहता।
कभी-कभी वर्षा का पानी धरती की दरारों में होकर अंदर पहुँच जाता है, जो गरम होकर भाप के रूप में बाहर निकलना चाहता है। ऐसी हालत में भी धरती डोल जाती है।
कभी-कभी धरती का गरम और पिघला हुआ पदार्थ, जिसे लावा कहते हैं, बड़े वेग के साथ ऊपर आता है और किसी पहाड़ को फोड़कर बाहर निकल जाता है। ऐसे पहाड़ को 'ज्वालामुखी' कहते हैं। जापान में कई ज्वालामुखी पर्वत हैं। भूकंप से जहाँ कई नुकसान होते हैं, वहाँ कुछ लाभ भी होते हैं। भूकंप आने से धरती में कई बदलाव होते हैं, जिससे अनेक धातुएँ एवं खनिज पदार्थ बाहर निकल आते हैं। ज्वालामुखियों का लावा धरती को बहुत उपजाऊ बना देता है।
भूकंप आने पर घर के बाहर निकल जाना चाहिए या दीवार से सटकर खड़े हो जाना चाहिए, ऊपर की मंजिलों पर रहने वालों को सीढ़ियों से नीचे आना चाहिए, लिफ़्ट से नहीं।
अगर आपको यह पोस्ट भूकंम क्यों आते है अच्छा लगा हो, तो इसे शेयर करें।

0 टिप्पणियाँ