जब बहुत सुबह चिड़ियाँ उठकर
कुछ गीत खुशी के गाती हैं,
कलियाँ दरवाजे खोल खोल
जब दुनिया पर मुसकाती हैं,
खुशबू की लहरें जब घर से
बाहर आ दौड़ लगाती हैं,
हे जग के सिरजनहार प्रभो!
तब याद तुम्हारी आती है।
जब छम-छम बूँदें गिरती हैं
बिजली चम चम कर जाती है,
मैदानों में, वन-बागों में
जब हरियाली लहराती है,
जब ठंडी-ठंडी हवा कहीं से
मस्ती ढोकर लाती है,
हे जग के सिरजनहार प्रभो !
तब याद तुम्हारी आती है।
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